श्रीराम रक्षा स्तोत्र (Shri Ram Raksha Stotra) – सम्पूर्ण पाठ, अर्थ, लाभ एवं पाठ विधि

श्रीराम रक्षा स्तोत्र का सम्पूर्ण हिंदी पाठ, अर्थ, महत्व, लाभ, पाठ करने की सही विधि और FAQs पढ़ें। भगवान श्रीराम की कृपा प्राप्त करने का दिव्य स्तोत्र।

श्रीराम रक्षा स्तोत्र (Shri Ram Raksha Stotra)

🙏 परिचय

श्रीराम रक्षा स्तोत्र भगवान श्रीराम को समर्पित अत्यंत पवित्र एवं शक्तिशाली स्तोत्र है। इसकी रचना महर्षि बुध कौशिक द्वारा की गई थी। मान्यता है कि स्वयं भगवान शिव ने स्वप्न में उन्हें इस स्तोत्र का उपदेश दिया था।

यह स्तोत्र भगवान श्रीराम की कृपा, सुरक्षा, साहस, मानसिक शांति और जीवन के सभी संकटों से रक्षा प्रदान करने वाला माना जाता है। जो भक्त श्रद्धा और विश्वास के साथ इसका नियमित पाठ करते हैं, उनके जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, आत्मविश्वास और आध्यात्मिक उन्नति का संचार होता है।

📖 श्रीराम रक्षा स्तोत्र सम्पूर्ण पाठ

॥ श्रीगणेशाय नमः

विनियोग:
अस्य श्रीरामरक्षास्त्रोतमन्त्रस्य बुधकौशिक ऋषिः ।
श्री सीतारामचंद्रो देवता ।
अनुष्टुप छंदः। सीता शक्तिः ।
श्रीमान हनुमान कीलकम ।
श्री सीतारामचंद्रप्रीत्यर्थे रामरक्षास्त्रोतजपे विनियोगः ।

अथ ध्यानम्‌:
ध्यायेदाजानुबाहुं धृतशरधनुषं बद्धपदमासनस्थं,
पीतं वासो वसानं नवकमल दल स्पर्धिनेत्रम् प्रसन्नम ।
वामांकारूढ़ सीता मुखकमलमिलल्लोचनम्नी,
रदाभम् नानालंकारदीप्तं दधतमुरुजटामण्डलम् रामचंद्रम ॥

राम रक्षा स्तोत्रम्:
चरितं रघुनाथस्य शतकोटि प्रविस्तरम् ।
एकैकमक्षरं पुंसां महापातकनाशनम् ॥1॥

ध्यात्वा नीलोत्पलश्यामं रामं राजीवलोचनम् ।
जानकीलक्ष्मणोपेतं जटामुकुटमण्डितं ॥2॥

सासितूणधनुर्बाणपाणिं नक्तंचरान्तकम् ।
स्वलीलया जगत्त्रातुमाविर्भूतमजं विभुम् ॥3॥

रामरक्षां पठेत प्राज्ञः पापघ्नीं सर्वकामदाम् ।
शिरो मे राघवः पातु भालं दशरथात्मजः ॥4॥

कौसल्येयो दृशो पातु विश्वामित्रप्रियः श्रुति ।
घ्राणं पातु मखत्राता मुखं सौमित्रिवत्सलः ॥5॥

जिह्वां विद्यानिधिः पातु कण्ठं भरतवन्दितः ।
स्कन्धौ दिव्यायुधः पातु भुजौ भग्नेशकार्मुकः ॥6॥

करौ सीतापतिः पातु हृदयं जामदग्न्यजित ।
मध्यं पातु खरध्वंसी नाभिं जाम्बवदाश्रयः ॥7॥

सुग्रीवेशः कटी पातु सक्थिनी हनुमत्प्रभुः ।
उरु रघूत्तमः पातु रक्षःकुलविनाशकृताः ॥8॥

जानुनी सेतुकृत पातु जंघे दशमुखांतकः ।
पादौ विभीषणश्रीदः पातु रामअखिलं वपुः ॥9॥

एतां रामबलोपेतां रक्षां यः सुकृति पठेत ।
स चिरायुः सुखी पुत्री विजयी विनयी भवेत् ॥10॥

पातालभूतल व्योम चारिणश्छद्मचारिणः ।
न द्रष्टुमपि शक्तास्ते रक्षितं रामनामभिः ॥11॥

रामेति रामभद्रेति रामचंद्रेति वा स्मरन ।
नरौ न लिप्यते पापैर्भुक्तिं मुक्तिं च विन्दति ॥12॥

जगज्जैत्रैकमन्त्रेण रामनाम्नाभिरक्षितम् ।
यः कण्ठे धारयेत्तस्य करस्थाः सर्वसिद्धयः ॥13॥

वज्रपञ्जरनामेदं यो रामकवचं स्मरेत ।
अव्याहताज्ञाः सर्वत्र लभते जयमंगलम् ॥14॥

आदिष्टवान् यथा स्वप्ने रामरक्षामिमां हरः ।
तथा लिखितवान् प्रातः प्रबुद्धो बुधकौशिकः ॥15॥

आरामः कल्पवृक्षाणां विरामः सकलापदाम् ।
अभिरामस्त्रिलोकानां रामः श्रीमान स नः प्रभुः ॥16॥

तरुणौ रूपसम्पन्नौ सुकुमारौ महाबलौ ।
पुण्डरीकविशालाक्षौ चीरकृष्णाजिनाम्बरौ ॥17॥

फलमूलाशिनौ दान्तौ तापसौ ब्रह्मचारिणौ ।
पुत्रौ दशरथस्यैतौ भ्रातरौ रामलक्ष्मणौ ॥18॥

शरण्यौ सर्वसत्वानां श्रेष्ठौ सर्वधनुष्मताम् ।
रक्षःकुलनिहन्तारौ त्रायेतां नो रघूत्तमौ ॥19॥

आत्तसज्जधनुषाविषुस्पृशा वक्ष याशुगनिषङ्गसङ्गिनौ ।
रक्षणाय मम रामलक्ष्मणावग्रतः पथि सदैव गच्छताम ॥20॥

सन्नद्धः कवची खड्गी चापबाणधरो युवा ।
गच्छन् मनोरथान नश्च रामः पातु सलक्ष्मणः ॥21॥

रामो दाशरथी शूरो लक्ष्मणानुचरो बली ।
काकुत्स्थः पुरुषः पूर्णः कौसल्येयो रघूत्तमः ॥22॥

वेदान्तवेद्यो यज्ञेशः पुराणपुरुषोत्तमः ।
जानकीवल्लभः श्रीमानप्रमेयपराक्रमः ॥23॥

इत्येतानि जपन नित्यं मद्भक्तः श्रद्धयान्वितः ।
अश्वमेधाधिकं पुण्यं सम्प्राप्नोति न संशयः ॥24॥

रामं दुर्वादलश्यामं पद्माक्षं पीतवाससम ।
स्तुवन्ति नामभिर्दिव्यैर्न ते संसारिणो नरः ॥25॥

रामं लक्ष्मणपूर्वजं रघुवरं सीतापतिं सुन्दरं,
काकुत्स्थं करुणार्णवं गुणनिधिं विप्रप्रियं धार्मिकम ।
राजेन्द्रं सत्यसंधं दशरथतनयं श्यामलं शांतमूर्तिं,
वन्दे लोकाभिरामं रघुकुलतिलकं राघवं रावणारिम ॥26॥

रामाय रामभद्राय रामचंद्राय वेधसे ।
रघुनाथाय नाथाय सीतायाः पतये नमः ॥27॥

श्रीराम राम रघुनन्दनराम राम,
श्रीराम राम भरताग्रज राम राम ।
श्रीराम राम रणकर्कश राम राम,
श्रीराम राम शरणं भव राम राम ॥28॥

श्रीराम चन्द्रचरणौ मनसा स्मरामि,
श्रीराम चंद्रचरणौ वचसा गृणामि ।
श्रीराम चन्द्रचरणौ शिरसा नमामि,
श्रीराम चन्द्रचरणौ शरणं प्रपद्ये ॥29॥

माता रामो मत्पिता रामचंन्द्र: ।
स्वामी रामो मत्सखा रामचंद्र: ।
सर्वस्वं मे रामचन्द्रो दयालु ।
नान्यं जाने नैव जाने न जाने ॥

दक्षिणे लक्ष्मणो यस्य वामे च जनकात्मज ।
पुरतो मारुतिर्यस्य तं वन्दे रघुनन्दनम् ॥31॥

लोकाभिरामं रणरंगधीरं राजीवनेत्रं रघुवंशनाथं ।
कारुण्यरूपं करुणाकरं तं श्रीरामचन्द्रं शरणं प्रपद्ये ॥32॥

मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम ।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीराम दूतं शरणं प्रपद्ये ॥33॥

कूजन्तं रामरामेति मधुरं मधुराक्षरम ।
आरुह्य कविताशाखां वन्दे वाल्मीकिकोकिलम ॥34॥

आपदामपहर्तारं दातारं सर्वसम्पदाम् ।
लोकाभिरामं श्रीरामं भूयो भूयो नमाम्यहम् ॥35॥

भर्जनं भवबीजानामर्जनं सुखसम्पदाम् ।
तर्जनं यमदूतानां रामरामेति गर्जनम् ॥36॥

रामो राजमणिः सदा विजयते,
रामं रमेशं भजे रामेणाभिहता,
निशाचरचमू रामाय तस्मै नमः ।
रामान्नास्ति परायणं परतरं,
रामस्य दासोस्म्यहं रामे चित्तलयः,
सदा भवतु मे भो राम मामुद्धराः ॥37॥

राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे ।
सहस्त्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने ॥38॥

🌸 श्रीराम रक्षा स्तोत्र का महत्व

श्रीराम रक्षा स्तोत्र केवल एक प्रार्थना नहीं, बल्कि भगवान श्रीराम की दिव्य कृपा प्राप्त करने का प्रभावशाली माध्यम है। सनातन धर्म में इसे अत्यंत शुभ और कल्याणकारी माना गया है।

इस स्तोत्र के नियमित पाठ से व्यक्ति के मन में सकारात्मक विचार उत्पन्न होते हैं और भय, चिंता तथा नकारात्मकता दूर होने लगती है। साथ ही भगवान श्रीराम का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

✨ श्रीराम रक्षा स्तोत्र के लाभ

नियमित रूप से श्रीराम रक्षा स्तोत्र का पाठ करने से अनेक आध्यात्मिक एवं मानसिक लाभ प्राप्त होते हैं।

  • जीवन में भय और असुरक्षा की भावना कम होती है।
  • मानसिक शांति एवं आत्मविश्वास बढ़ता है।
  • नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा होती है।
  • परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
  • भगवान श्रीराम की कृपा प्राप्त होती है।
  • कठिन परिस्थितियों में साहस और धैर्य मिलता है।
  • आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।
  • मन एकाग्र होता है और सकारात्मक सोच विकसित होती है।

🪔 श्रीराम रक्षा स्तोत्र पाठ करने की विधि

यदि आप अधिक फल प्राप्त करना चाहते हैं, तो निम्न विधि अपनाएँ—

  1. प्रातः स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  2. भगवान श्रीराम, माता सीता और हनुमान जी का ध्यान करें।
  3. दीपक एवं धूप जलाएँ।
  4. शांत मन से श्रीराम रक्षा स्तोत्र का पाठ करें।
  5. अंत में भगवान श्रीराम की आरती करें और प्रसाद अर्पित करें।

⏰ श्रीराम रक्षा स्तोत्र पढ़ने का सही समय

हालाँकि इसका पाठ किसी भी समय किया जा सकता है, लेकिन विशेष रूप से—

  • प्रातः ब्रह्ममुहूर्त
  • सूर्य उदय के बाद
  • संध्या समय
  • राम नवमी
  • मंगलवार
  • गुरुवार

इन दिनों एवं समय में पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

📜 श्रीराम रक्षा स्तोत्र का आध्यात्मिक महत्व

शास्त्रों के अनुसार श्रीराम रक्षा स्तोत्र केवल शारीरिक सुरक्षा ही नहीं, बल्कि मानसिक, आध्यात्मिक और नैतिक शक्ति भी प्रदान करता है।

इसका नियमित पाठ व्यक्ति को धर्म, सत्य, मर्यादा और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। यही कारण है कि इसे सनातन धर्म के सबसे प्रभावशाली स्तोत्रों में से एक माना जाता है।


❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. श्रीराम रक्षा स्तोत्र किसने लिखा?

महर्षि बुध कौशिक ने इसकी रचना की थी।


2. श्रीराम रक्षा स्तोत्र कब पढ़ना चाहिए?

प्रातःकाल, संध्या या किसी भी शुभ समय में श्रद्धा से इसका पाठ किया जा सकता है।


3. क्या महिलाएँ श्रीराम रक्षा स्तोत्र पढ़ सकती हैं?

हाँ, महिलाएँ एवं पुरुष दोनों श्रद्धापूर्वक इसका पाठ कर सकते हैं।


4. क्या रोज़ श्रीराम रक्षा स्तोत्र पढ़ना चाहिए?

हाँ, प्रतिदिन इसका पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है।


5. श्रीराम रक्षा स्तोत्र पढ़ने से क्या लाभ होता है?

मानसिक शांति, साहस, सुरक्षा, सकारात्मक ऊर्जा एवं भगवान श्रीराम की कृपा प्राप्त होती है।


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🏵️ निष्कर्ष

श्रीराम रक्षा स्तोत्र भगवान श्रीराम की कृपा प्राप्त करने का अत्यंत पवित्र एवं प्रभावशाली स्तोत्र है। इसका नियमित पाठ व्यक्ति के जीवन में साहस, शांति, सकारात्मकता और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करता है। यदि आप प्रतिदिन श्रद्धा और विश्वास के साथ इसका पाठ करते हैं, तो भगवान श्रीराम की कृपा सदैव आपके साथ बनी रहती है।

॥ श्रीरामचन्द्रार्पणमस्तु ॥

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