Author name: amitbtiwari.84@gmail.com

Chalisa

श्री सरस्वती चालीसा

दोहा  जनक जननि पद्मरज, निज मस्तक पर धरि। बन्दौं मातु सरस्वती, बुद्धि बल दे दातारि॥ पूर्ण जगत में व्याप्त तव,

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श्री लक्ष्मी चालीसा

दोहामातु लक्ष्मी करि कृपा करो हृदय में वास। मनोकामना सिद्ध कर पुरवहु मेरी आस॥ सिंधु सुता विष्णुप्रिये नत शिर बारंबार।

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श्री दुर्गा चालीसा

नमो नमो दुर्गे सुख करनी ।नमो नमो अंबे दुःख हरनी ॥ 1 ॥ निरंकार है ज्योति तुम्हारी ।तिहू लोक फैली

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