श्री सरस्वती चालीसा
दोहा जनक जननि पद्मरज, निज मस्तक पर धरि। बन्दौं मातु सरस्वती, बुद्धि बल दे दातारि॥ पूर्ण जगत में व्याप्त तव, […]
दोहा जनक जननि पद्मरज, निज मस्तक पर धरि। बन्दौं मातु सरस्वती, बुद्धि बल दे दातारि॥ पूर्ण जगत में व्याप्त तव, […]
दोहामातु लक्ष्मी करि कृपा करो हृदय में वास। मनोकामना सिद्ध कर पुरवहु मेरी आस॥ सिंधु सुता विष्णुप्रिये नत शिर बारंबार।
नमो नमो दुर्गे सुख करनी ।नमो नमो अंबे दुःख हरनी ॥ 1 ॥ निरंकार है ज्योति तुम्हारी ।तिहू लोक फैली
।।दोहा।। श्री गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान। कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥ जय गिरिजा पति दीन दयाला। सदा
हनुमान चालीसा क्या है? हनुमान चालीसा भगवान श्री हनुमान जी की महिमा का वर्णन करने वाला अत्यंत प्रसिद्ध और चमत्कारी
दोहाजय गणपति सद्गुण सदन कविवर बदन कृपाल।विघ्न हरण मंगल करण जय जय गिरिजालाल॥ ॥ चौपाई ॥जय जय जय गणपति राजू।मंगल
भगवान गणेश हिन्दू धर्म के सबसे पूजनीय देवताओं में से एक हैं। इन्हें बुद्धि, ज्ञान और सफलता के देवता माना